ब्यूरो चीफ – शेख सिराजुद्दीन, आकोला (नेशनल टाइम न्यूज़)
महाभारत काल से जोयड़ा श्याम बावजी स्थापनक मंदिर पर महा प्रसादी
क्षेत्र के हजारों श्रदालुओं सहित आकोला के लगभग हर घर से श्रदालुओं ने लिया भाग
आकोला। क्षेत्र के जोयडा श्याम बावजी परिसर में परम्परानुसार सामूहिक महाप्रसादी का आयोजन किया गया। जानकरी के अनुसार नगर से दस किलोमीटर दूर जोयडा श्याम बावजी मंदिर परिसर में नगरवासियों, पंच, पटेलों आदि ने पम्परानुसार चंदा राशि एकत्रित कर सामूहिक रूप से महाप्रसाद का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में नगर वासियों सहित आसपास के सैंकड़ों ग्रामीणों ने भाग लेकर प्रसाद ग्रहण किया। बुजुर्ग ग्रामीणों ने बताया कि जिले के भूपालसागर तहसील क्षेत्र की निलोद ग्राम पंचायत के अन्तर्गत आने वाला जोयडा बावजी तीर्थ स्थल सदियो से पशुपालकों व श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र रहा है। यही नही पशुपालक जोयडा बावजी को मवेशियों का डाक्टर मान कर पूजते है। करीब एक हजार की आबादी वाला जोयड़ा जिले का अंतिम गांव है। यहां एक मंदिर है जिसे जोयडा बावजी के नाम से जाना जाता है।

यहा आने वाले अधिकांश श्रद्धालु पशुपालक होते है, जो बीमार मवेशी के ठीक होने की कामना से मन्नत बोलमा बोलकर जाते है और मवेशी के ठीक होने पर बोलमा उतारने आते है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र गुजरात, छत्तीसगढ, आदि राज्यो से श्रद्धालु यहां आते है।
पुराने लोग बताते है कि जोयडा आदिकालीन सम्यता का गांव है जिसकी उत्पन्न जोदड़ो से हुई। पांडवो ने अज्ञात वास के दौरान इस मंदिर को स्थापित किया था यहां पांडाव मारदड़ी खेलते थे जिसका प्रमाण यहां मौजूद गोल चट्टान दड़ी व लम्बी चट्टान गठी है, इसका उल्लेख महाभारत में भी है। जोयडा गांव जिस टीले पर बसा है उसके बीच आयड़ कालीन सभ्यता के अवशेष दबे है। ग्रामीणों ने बताया कि जोयडा गांव में ही जोयडा बावजी का मूल मंदिर है। देवगढ, कुवांरिया, कांकरिया आदि गांवो में जोयडा बावजी की जोत है। मंदिर द्वापर युग का है तथा सदियो से इसे इसी नाम से जाना जाता रहा है।

फोटो आकोला। जोयड़ा श्याम बावजी मंदिर पर महा प्रसादी में प्रसाद लेते क्षेत्र के लोग।
