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सरकारी पैसे से बना कचरा संग्रहण केंद्र- कचरे का ढांचा ! जनता के पैसे बर्बाद ,सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी चोरी की पुलिस FIR दर्ज कराई ?

जनता के पैसे की बर्बादी पर सवाल—शेड के पत्रे गायब, सरकारी सामान की कथित चोरी; सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी ने FIR दर्ज कराई या नहीं?

रिपोर्टर :-  पवन कुमार सोनी ( जासमा

गांव को स्वच्छ और साफ रखने के उद्देश्य से मनरेगा एवं स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के तहत बनाया गया कचरा संग्रहण केंद्र, जासमा आज खुद बदहाली की तस्वीर बन चुका है। जिस केंद्र का निर्माण गांव के कचरे को एक स्थान पर एकत्रित करने और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया गया था, आज उसकी हालत देखकर सरकारी धन के उपयोग, निर्माण गुणवत्ता रखरखाव और योजना के वास्तविक क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मौके से सामने आई तस्वीरें इस केंद्र की मौजूदा स्थिति को साफ बयां कर रही हैं। छत के कई पत्रे गायब/उखड़े हुए हैं, परिसर क्षतिग्रस्त, अंदर अव्यवस्था और टूटे-बिखरे सामान दिखाई दे रहे हैं तथा पूरा केंद्र लंबे समय से उपेक्षित नजर आ रहा है।


1. सबसे बड़ा सवाल—कचरा संग्रहण केंद्र बना, लेकिन कचरा संग्रहण हुआ भी या नहीं?

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल भवन की खराब हालत से भी बड़ा है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार आज तक गांव का कचरा इस केंद्र पर नियमित रूप से संग्रहित नहीं किया जा रहा है। दूसरी ओर गांव में जगह-जगह कचरा दिखाई देने की बात सामने आ रही है।

अगर गांव का कचरा आज भी जगह-जगह पड़ा है और कचरा संग्रहण के लिए बनाया गया केंद्र खुद वीरान पड़ा है, तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है—

आखिर इस केंद्र का निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था?

क्या योजना का लाभ वास्तव में ग्रामीणों को मिला?

क्या सिर्फ भवन बनाकर सरकारी योजना की औपचारिकता पूरी कर दी गई?

स्वच्छ भारत मिशन का मूल उद्देश्य गांवों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है। ऐसे में यदि कचरा संग्रहण केंद्र का नियमित उपयोग ही नहीं हो रहा, तो योजना के उद्देश्य और उसके जमीनी क्रियान्वयन की जांच जरूरी हो जाती है।


2. जनता के पैसे का हिसाब कौन देगा?

यह केंद्र जनता के पैसे से बनी सार्वजनिक संपत्ति है। मनरेगा और SBM जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से विकास एवं स्वच्छता के लिए धन खर्च किया जाता है।

लेकिन सवाल यह है कि यदि पैसा खर्च करके केंद्र बनाया गया, उसके बाद उसका रखरखाव नहीं हुआ, शेड के पत्रे उखड़ गए, परिसर क्षतिग्रस्त और गांव का कचरा फिर भी जगह-जगह दिखाई दे रहा है, तो—

क्या सरकारी धन का उद्देश्य पूरा हुआ?

जनता को यह जानने का अधिकार है कि इस केंद्र के निर्माण पर कुल कितनी राशि खर्च हुई, किस मद से राशि आई, किसके माध्यम से काम कराया गया और निर्माण के बाद इसकी देखरेख की जिम्मेदारी किसकी थी।


3. सरकारी लोहे के सामान की कथित चोरी—FIR हुई या नहीं?

मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि स्थानीय स्तर पर केंद्र में लगे कुछ सरकारी लोहे के सामान के कथित रूप से चोरी होने की जानकारी सामने आ रही है।

यदि सरकारी संपत्ति चोरी हुई है तो यह गंभीर विषय है।

अब सबसे सीधा सवाल है—

A. क्या सरपंच देवी लाल जूनी ने इस कथित चोरी की पुलिस FIR दर्ज कराई?

B. क्या ग्राम विकास अधिकारी हर्षिता राव ने इसकी पुलिस शिकायत दर्ज कराई?

C. क्या चोरी हुए सामान का पंचनामा बनाया गया?

D. क्या संबंधित उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई?

E. क्या सरकारी संपत्ति की चोरी के मामले में किसी की जिम्मेदारी तय हुई?

यदि चोरी हुई है और शिकायत नहीं की गई, तो यह भी जांच का विषय है कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार स्तर पर क्या कार्रवाई की गई।

National Time News किसी व्यक्ति को चोरी का दोषी घोषित नहीं करता। चोरी के आरोप की पुष्टि जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से होना आवश्यक है। लेकिन यदि सरकारी सामान गायब है, तो उसकी जांच और शिकायत क्यों नहीं हुई—यह सवाल जरूर उठता है।

4. सरपंच देवी लाल जूनी और ग्राम विकास अधिकारी हर्षिता राव से जवाब अपेक्षित

जासमा ग्राम पंचायत के सरपंच देवी लाल जूनी और ग्राम विकास अधिकारी हर्षिता राव की भूमिका को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है।

यह किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है।

यह जनता के पैसे से बनी सार्वजनिक संपत्ति है।

यदि किसी की निजी संपत्ति में शेड उड़ जाए या उसका सामान चोरी हो जाए तो वह उसकी सुरक्षा और मरम्मत के लिए तत्काल प्रयास करता है।

तो फिर सरकारी संपत्ति को इस हालत में क्यों छोड़ा गया?

क्या सरकारी संपत्ति की कोई जिम्मेदारी नहीं?

क्या जनता के टैक्स के पैसे से बनी संपत्ति के रखरखाव की कोई जवाबदेही नहीं ?


5. मामला अब जांच की मांग करता है

मौके की तस्वीरें और सामने आ रही जानकारी लापरवाही, अनियमितता और संभावित वित्तीय गड़बड़ी की जांच की जरूरत जरूर पैदा करती हैं।

हालांकि बिना जांच किसी अधिकारी, कर्मचारी, सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी या ठेकेदार को भ्रष्टाचार का दोषी बताना उचित नहीं होगा।

लेकिन सवाल यह है कि अगर सब कुछ नियम के अनुसार हुआ है तो जांच से डर कैसा?

प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए और सार्वजनिक करे कि—

  • निर्माण पर कितनी राशि खर्च हुई?
  • कार्य कब स्वीकृत हुआ?
  • निर्माण किस एजेंसी/ठेकेदार ने किया?
  • तकनीकी जांच किसने की?
  • शेड की मजबूती की जांच हुई या नहीं?
  • केंद्र का नियमित संचालन क्यों नहीं हो रहा?
  • सरकारी सामान गायब होने की शिकायत हुई या नहीं?
  • केंद्र के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?

National Time News के प्रशासन से 10 सीधे सवाल

1. मनरेगा एवं SBM के तहत कचरा संग्रहण केंद्र जासमा के निर्माण पर कुल कितनी राशि खर्च हुई?

2. इस केंद्र का निर्माण कब और किस एजेंसी/ठेकेदार के माध्यम से कराया गया?

3. निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं तकनीकी जांच किस अधिकारी ने की?

4. शेड के पत्रे उखड़ने/गायब होने के बाद आज तक उसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?

5. क्या निर्माण के समय शेड की मजबूती और गुणवत्ता का तकनीकी परीक्षण किया गया था?

6. सरकारी लोहे का सामान कथित रूप से गायब होने पर क्या पुलिस FIR/शिकायत दर्ज कराई गई?

7. यदि FIR नहीं हुई तो सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कौन है?

8. आज तक गांव के कचरे का नियमित संग्रहण इस केंद्र के माध्यम से क्यों नहीं हो रहा है?

9. सरपंच देवी लाल जूनी एवं ग्राम विकास अधिकारी हर्षिता राव ने केंद्र की बदहाली को लेकर अब तक क्या लिखित कार्रवाई की?

10. प्रशासन इस केंद्र की मरम्मत, साफ-सफाई, नियमित कचरा संग्रहण और कथित चोरी की जांच कब तक पूरी करेगा?

National Time News जवाब हेतु – 

ई-मेल: nationaltimenews@gmail.com

संबंधित सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी एवं प्रशासन से अनुरोध है कि इस पूरे मामले पर अपना पक्ष/स्पष्टीकरण National Time News को ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराएं। प्राप्त जवाब को खबर में उचित स्थान दिया जाएगा।


6. तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचेगा

National Time News के संज्ञान में आए इस मामले में यदि तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो उपलब्ध तस्वीरों, दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर मामले को संबंधित उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत के रूप में प्रस्तुत कर निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।

क्योंकि सवाल केवल एक भवन का नहीं है।

सवाल सरकारी धन का है।

सवाल जनता की सुविधा का है।

सवाल गांव की स्वच्छता का है।

सवाल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा का है।

और सबसे बड़ा सवाल—

जिस कचरा संग्रहण केंद्र को गांव का कचरा समेटना था, आज वही खुद बदहाली का ढांचा क्यों बन गया?

अगर योजना का उद्देश्य स्वच्छता था, तो जासमा में आज भी जगह-जगह कचरा क्यों दिखाई दे रहा है?

अगर सरकारी संपत्ति की चोरी हुई, तो FIR क्यों नहीं?

अगर शेड खराब हुआ, तो मरम्मत क्यों नहीं?

और अगर सरकारी धन पूरी तरह नियमों के अनुसार खर्च हुआ, तो पूरे मामले की जांच और खर्च का हिसाब जनता के सामने रखने में देरी क्यों?

जासमा की तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं—अब प्रशासन को जवाब देना होगा।

पुराने वीडियो और तस्वीरें भी खोल रहे हैं व्यवस्था की पोल

इस मामले से जुड़े कुछ पुराने वीडियो और तस्वीरें भी ग्रामीणों द्वारा National Time News को उपलब्ध कराए गए हैं। इन पुराने वीडियो और तस्वीरों में भी केंद्र की स्थिति को लेकर सवाल उठते दिखाई देते हैं।

यदि समय रहते संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और ग्राम पंचायत द्वारा इस ओर ध्यान दिया जाता, तो संभवतः शेड और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था। समय पर निरीक्षण, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था की जाती तो आज स्थिति इतनी खराब नहीं होती।

ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए इन वीडियो एवं तस्वीरों को भी खबर के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि प्रशासन और आम जनता पूरे मामले की स्थिति को स्वयं देख सके।

ग्रामीणों का सवाल—जब समय रहते तस्वीर सामने आ रही थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

National Time News संबंधित अधिकारियों से इस मामले में उनका पक्ष भी जानना चाहता है। सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारी अपना स्पष्टीकरण nationaltimenews@gmail.com पर भेज सकते हैं। प्राप्त जवाब को समाचार में उचित स्थान दिया जाएगा।

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