ब्यूरो चीफ – शेख सिराजुद्दीन, आकोला (नेशनल टाइम न्यूज़)
आकोला। नगरपालिका द्वारा बनवाया साइन बोर्ड राहगीर यात्रियों को कर रहा गुमराह।
सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों व कर्मचारियों की गलती उजागर होने के एक सप्ताह बाद भी नहीं हुआ सुधार। हाइवे पर जो बोर्ड होते है, उनका काम आगे आने वाले गांव शहरों की दूरी और नाम बताना होता है, इस वजह से हरे साइन बोर्ड का प्रयोग किया जाता है जो शांतिदायक रंग होता है और ये ध्यान नही भटकाता।

साइन बोर्ड एक प्रकार का बोर्ड होता है जिसका उपयोग किसी संदेश या सूचना को दृश्यमान तरीके से प्रदर्शित करने के लिए किया जाता हैं, जिसका उपयोग आमतौर पर विज्ञापन या रास्ता खोजने के उद्देश्यों के लिए किया जाता है। नगर पालिका मंडल आकोला आपका हार्दिक स्वागत करती है। आपकी यात्रा मंगलमय हो। वहीं बोर्ड पर विश्व प्रसिद्ध सांवरिया जी 91 किलो मीटर दूरी बता दी, जबकि वास्तविक लगभग 51 किमी ही है। जबकि की वर्क ऑडर में किलोमीटर दूरी, शहर – गांव का नाम सभी होने के बावजूद गलतियां होना आखिर क्या दर्शाता है। गौरतलब बात ये है कि छोटे बड़े गाँव के नाम में या किलोमीटर में गलती होती तो विशेष ध्यान नही जाता लेकिन राजस्थान ही नहीं मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र आदि क्षेत्र से आने वाले यात्रियों का तीर्थस्थल सांवरिया जी को 91 किलोमीटर दिखाकर राहगीरों यात्रियों को गुमराह कर रहा है। दिन मे तो यात्रा करने वाले ग्रामीणों से रास्ता या किलोमीटर पूछकर निकलते हैं, लेकिन रात्रि में हाइवे के यही बोर्ड यात्रियों का सहारा होता है लेकिन यही साइन बोर्ड सरेआम यात्रियों को गुमराह कर रहा है। लेकिन अभी तक किसी जनप्रतिनिधि या कर्मचारी की नींद नहीं खुली, और अभी तक सुधार करने की जहमत नहीं उठाई।
फोटो आकोला। आकोला कीर कि चोकी हाईवे पर लगा साइन बोर्ड यात्रियों को कर रहा गुमराह।
